ग्रहण क्या है सूर्य और चन्द्र ग्रहण कैसे लगता है।

ग्रहण क्या है सूर्य और चन्द्र ग्रहण कैसे लगता है।

भारतीय सभ्यता और संस्कृति में ग्रहण का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म ग्रंथों में ग्रहण के प्रभाव का वर्णन किया गया है। धर्म ग्रंथों में गर्भवती महिलाओं तथा बच्चों पर ग्रहण के विशेष प्रभाव का वर्णन मिलता है। ग्रहण क्या है सूर्य और चन्द्र ग्रहण कैसे लगता है।  आइए जानते हैं इस पोस्ट में:-

ग्रहण क्या है?
What is Eclipse?

ग्रहण एक खगोलीय घटना है। इस घटना में जब सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा आ जाती है या सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है। तो ऐसी स्थिति में पृथ्वी के कुछ हिस्सों पर सूर्य की रोशनी अथवा चंद्रमा का प्रकाश नहीं पहुंच पाता। तो इस स्थिति को ग्रहण कहते हैं।
ग्रहण दो प्रकार के होते हैं:-
1• चन्द्र ग्रहण
2• सूर्य ग्रहण

☆ चन्द्र ग्रहण Lunar Eclipse


जब सूर्य और चंद्रमा के बीच में पृथ्वी आ जाती है तब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। ऐसी स्थिति को चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) कहते हैं। चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा को लगता है।

ग्रहण क्या है सूर्य और चन्द्र ग्रहण कैसे लगता है।
चन्द्र ग्रहण Lunar Eclipse

 

 

☆ सूर्य ग्रहण Solar Eclipse


जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाती है तो पृथ्वी के जिन क्षेत्रों में चंद्रमा सूर्य को ढक लेता है। वहां सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) होता है। सूर्य ग्रहण की घटना अमावस्या के दिन होती है। वर्ष में न्यूनतम 2 तथा अधिकतम 5 सूर्यग्रहण हो सकता है।

ग्रहण क्या है सूर्य और चन्द्र ग्रहण कैसे लगता है।
सूर्य ग्रहण Solar Eclipse

☆ सूर्य ग्रहण के प्रकार
Type of Solar Eclipse


पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Eclipse) 

जब चंद्रमा पृथ्वी के काफी पास रहते हुए सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाती है। और इससे पृथ्वी से सूर्य पूरी तरह ढकी हुई प्रतीत होती है। तथा पृथ्वी पर कुछ हिस्सों में अंधेरा छा जाता है। ऐसी स्थिति को पूर्ण सूर्य ग्रहण कहा जाता है।

ग्रहण क्या है सूर्य और चन्द्र ग्रहण कैसे लगता है।
पूर्ण सूर्य ग्रहण

वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Eclipse) 

जब चंद्रमा पृथ्वी के काफी दूर रहते हुए सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाती है। और पृथ्वी से देखने पर चंद्रमा द्वारा सूर्य पूरी तरह ढका दिखाई नहीं देता है। बल्कि सूर्य के चारों ओर बाहरी हिस्सा वलयाकार या रिंग के जैसा प्रतीत होता है। तो ऐसी स्थिति को वलयाकार सूर्यग्रहण कहते हैं।

ग्रहण क्या है सूर्य और चन्द्र ग्रहण कैसे लगता है।
वलयाकार (डायमंड रिंग) सूर्य ग्रहण

आंशिक सूर्यग्रहण (Partial Eclipse) 

जब चन्द्रमा सूर्य के कुछ भाग को ही ढक पाती है। और सूर्य का कुछ ही भाग पृथ्वी से नहीं दिखाई पड़ता है। ऐसी स्थिति को आंशिक सूर्यग्रहण कहते है। 

ग्रहण क्या है सूर्य और चन्द्र ग्रहण कैसे लगता है।
आंशिक सूर्यग्रहण

☆ ग्रहण से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
Important things related to eclipse



• चंद्रग्रहण हमेशा पूर्णिमा को ही होता है परंतु प्रत्येक पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं लगता। क्योंकि पृथ्वी और चंद्रमा के कछ तलों के बीच परस्पर 5° का झुकाव होने के कारण ऐसा होता है।

• सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या को लगता है। परंतु प्रत्येक अमावस्या को सूर्य ग्रहण नहीं होता। क्योंकि पृथ्वी और चंद्रमा के कक्ष तलों के बीच 5° के झुकाव होने के कारण ऐसा होता है।

• जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है तो इसे पूर्ण सूर्यग्रहण कहा जाता है। लेकिन जब चंद्रमा सूर्य का कुछ ही भाग ढ़क पाता है तो ऐसी स्थिति को आंशिक सूर्यग्रहण कहते हैं।

• सूर्य ग्रहण में जब सूर्य चमकती हुई अंगूठी के रूप में दिखाई पड़ता है तो इसे डायमंड रिंग कहा जाता है।

• एक कैलेंडर वर्ष में सूर्य और चंद्र ग्रहण को मिलाकर अधिकतम सात ग्रहण हो सकते हैं।

• सूर्य ग्रहण की घटना एक कैलेंडर वर्ष में कम से कम 2 बार और अधिकतम 5 बार हो सकती है।

• एक पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total eclipse) अधिकतम 7.5 मिनट तक का ही हो सकता है.

☆ सूर्य ग्रहण के समय धार्मिक मान्यताएं



• ऐसी धार्मिक मान्यताएं हैं कि ग्रहण लगने के समय भोजन नहीं करना चाहिए। क्योंकि ग्रहण के समय कीटाणु या सूक्ष्म जीवाणु अधिक पनपते हैं और खाने को दूषित कर देते हैं।

• ग्रहण के बाद स्नान करने का विधान है। क्योंकि स्नान करने से शरीर में ऊष्मा का संचार होता है। साथ ही ग्रहण के दौरान पर शरीर पर पनपे कीटाणु धूल कर नष्ट हो जाते हैं।

• ग्रहण के दौरान भगवान का पूजन, यज्ञ, जप, भजन-कीर्तन करने का भी विधान है।

• ग्रहण के दौरान तेल लगाना, भोजन करना, जल पीना, मल मूत्र त्याग करना, केश विन्यास का बनाना, रति क्रीड़ा, मंजन इत्यादि वर्जित किया गया है।

• ऋग्वेद के अनुसार महर्षि अत्रि ग्रहण का ज्ञान देने वाले प्रथम आचार्य थे।

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शोध एवं संकलन
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महेंद्र प्रसाद दांगी
शिक्षक

प्रस्तुतकर्ता
www.gyantarang.com

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