Class 10 manufacturing industries question answer in hindi

Class 10 manufacturing industries question answer in hindi

Class:- 10th
Subject:- Geography
Chapter:- 06. manufacturing industries
विनिर्माण उद्योग
Topic:- manufacturing industries question answer in hindi अभ्यास के प्रश्नों का उत्तर

1. बहुवैकल्पिक प्रश्न

(I) निम्न में से कौन-सा उद्योग चुना पत्थर को कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त करते हैं?

(अ) एल्युमिनियम
(ब) चीनी
(स) सीमेंट
(द) पटसन

उत्तर :- (स) सीमेंट

व्याख्या:-
• चुना पत्थर सीमेंट उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है।
• सीमेंट बनाने के लिए चुना पत्थर और मृतिका (क्ले) के मिश्रण को एक भट्टी में उच्च ताप पर जलाया जाता है। इसके बाद इस प्रक्रिया के परिणाम स्वरूप प्राप्त खंगर (क्लिंकर) को जिप्सम के साथ मिलाकर महीन पिसा जाता है। जिसके बाद अंतिम रूप से साधारण पोर्टलैंड सीमेंट प्राप्त होता है।

(II) निम्न में से कौन-सी एजेंसी सार्वजनिक क्षेत्र में स्टील को बाजार में उपलब्ध कराती है?

(अ) हेल (HAIL)
(ब) सेल (SAIL)
(स) टाटा स्टील
(द) एम.एन.सी.सी. (MNCC)

उत्तर:- (ब) सेल (SAIL)

व्याख्या:-
• सेल अर्थात स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (SAIL) सार्वजनिक क्षेत्र में स्टील को बाजार में उपलब्ध करवाती है।
• इसे भारतीय इस्पात प्राधिकरण के नाम से भी जाना जाता है।
• यह भारत की सर्वाधिक इस्पात उत्पादन करने वाली कम्पनी है।
• यह कंपनी घरेलु निर्माण, इंजीनियरिंग, बिजली, रेलवे, मोटर गाड़ी, सुरक्षा उपकरण आदि के रूपों में इस्पात तैयार करती है।
•   भारतीय इस्पात प्राधिकरण (स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया) को वर्ष 2010 में महारत्न कंपनी बनने का गौरव हासिल हुआ है।

(III) निम्न में से कौन-सा उद्योग बॉक्साइट को कच्चे माल के रूप में प्रयोग करता है?

(अ) एल्युमिनियम
(ब) सीमेंट
(स) पटसन
(द) स्टील

उत्तर:- (अ) एल्युमिनियम

व्याख्या:
• बॉक्साइट से एल्मुनियम तैयार किया जाता है इसलिए बॉक्साइट एल्मुनियम उद्योग का प्रमुख कच्चा माल है।
• लगभग 1 टन एल्मुनियम तैयार करने में लगभग 6 टन बॉक्साइट की आवश्यकता पड़ती है।

(IV) निम्न में से कौन-सा दूरभाष, कंप्यूटर आदि संयंत्र निर्मित करते हैं?

(अ) स्टील
(ब) एल्युमीनियम
(स) इलैक्ट्रॉनिक
(द) सूचना प्रौद्योगिकी

उत्तर :- (स) इलैक्ट्रॉनिक

व्याख्या:-
• सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित उपकरणों का उत्पादन इलेक्ट्रॉनिक उद्योग के अंतर्गत आता है। दूरभाष, कंप्यूटर टेलीविजन, सेल्यूलर टेलीकॉम, पेजर, प्रिंटर, रडार इत्यादि उपकरण इलेक्ट्रॉनिक उद्योग से संबंधित है।
• बेंगलुरु भारत के इलेक्ट्रॉनिक राजधानी के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ, कोयंबटूर में इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।

(I) विनिर्माण क्या है?

उत्तर:- कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में बदलकर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन को विनिर्माण या वस्तु निर्माण कहा जाता है। जैसे: कपास से सूत या कपड़ा, लुगदी से कागज, गन्ना से चीनी, गेहूं से आटा, आटा से रोटी या बिस्कुट, लौह अयस्क से लोहा-इस्पात, खनिज तेल से रासायनिक पदार्थ तथा बॉक्साइट से एल्युमिनियम बनाने की प्रक्रिया को विनिर्माण उद्योग कहा जाता है।

(II) उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन भौतिक कारक बताएँ?

उत्तर :-
(i) कच्चे माल की उपलब्धता:- निर्माण उद्योग की सबसे प्रथम आवश्यकता कच्चे माल की होती है। जिसका रूप और उपयोग बदलकर मूल्य में वृद्धि की जाती है। कच्चे माल अपेक्षाकृत सस्ते तथा सरलता से प्राप्त होने चाहिए। जैसे:- सीमेंट के लिए कच्चा माल चुना पत्थर है, उसी प्रकार कपड़ा के लिए कच्चा माल कपास है।

(ii) शक्ति के साधन :– वर्तमान में सभी निर्माण उद्योग किसी न किसी रूप से शक्ति साधनों पर निर्भर करते हैं। मशीनों को चलाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है।

(iii) जलवायु :- उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए जलवायु और स्वास्थ्य अनुकूल होना जरूरी है। साथ ही कुछ उद्योगों के लिए विशेष प्रकार की जलवायु का महत्व होता है। जैसे सूती वस्त्र उद्योग के लिए आर्द्र जलवायु का होना जरूरी है। जिससे धागे टूटते नहीं है। यही कारण है कि महाराष्ट्र और गुजरात के आसपास सूती वस्त्र के कारखाने अधिक है। ये दोनों क्षेत्र समुद्र के किनारे हैं।

(III) औद्योगिक अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन मानवीय कारण बताएँ।
(Jac board 2010, 2015, 2018, 2020)

उत्तर :-
(i) पूंजी:- पूंजी के बिना औद्योगिक विकास संभव नहीं है। क्योंकि उद्योग लगाने, मशीन खरीदने, कच्चे माल आदि के लिए पूंजी की आवश्यकता पड़ती है। इस कारण उद्योगों में पूंजी महत्वपूर्ण कारक है।

(ii) बैंकिंग सुविधा:- उद्योग धंधों में प्रतिदिन लाखों रुपए का लेनदेन होता है। साथ ही उद्योगों को लगाने के लिए  पूंजी की आवश्यकता पड़ती है। जिसका कुछ हिस्सा बैंकों से कर्ज के रूप में लेना पड़ता है। जो बैंकों द्वारा ही संभव है। जहाँ इस प्रकार की सुविधा होती है। वहाँ उद्योग-धंधे आसानी से स्थापित होती हैं।

(iii) सरकार की नीति:- सरकार अपनी नीतियों के अनुसार उद्योगों को बढ़ावा देती है। उदाहरण के लिए हरिद्वार में दवाईयाँ बनाने का कारखाना सरकार द्वारा किए गए प्रयासों का ही परिणाम है। कुछ वर्ष पूर्व सरकार के अरुचि के कारण ही बंगाल से टाटा की इकाई को हटाकर गुजरात में लगाया गया था।

(IV) आधारभूत उद्योग क्या हैं? उदाहरण देकर बताएँ।
(Jac board  2009)

उत्तर :- वैसे उद्योग जिनसे प्राप्त उत्पाद अन्य उद्योगों में कच्चे माल के रूप में प्रयोग में लाए जाते हैं। इसलिए इन्हें आधारभूत उद्योग कहते हैं। जैसे:- लोहा-इस्पात उद्योग, तांबा प्रगलन उद्योग, एलुमिनियम प्रगलन उद्योग एवं पेट्रो रासायनिक उद्योग इत्यादि।

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 120 शब्दों में दीजिए।

(I) समंवित इस्पात उद्योग मिनी इस्पात उद्योगों से कैसे भिन्न है? इस उद्योग की क्या समस्याएं हैं? किन सुधारों के अंतर्गत इसकी उत्पादन क्षमता बढ़ी हैं?
(Jac board 2009)

उत्तर :- समंवित इस्पात उद्योग  – समंवित या एकीकृत  इस्पात संयंत्र एक बड़ा संयंत्र होता है। एकीकृत इस्पात संयंत्र से हमारा तात्पर्य ऐसे कारखाने से है। जहां एक ही स्थान पर, धमन भट्टी में लोहे को पिघलाकर पिग आयरन बनाना, उससे इस्पात बनाना, इस्पात की चादरें, पाइप, लोहे की रेल पटरिया आदि बनाया जाता है।
इस समय देश में लोहा और इस्पात बनाने वाले 10 प्रमुख एकीकृत कारखाने हैं।

मिनी इस्पात उद्योग – विद्युत चालित धमन भट्टिया सामान्यतः छोटे इस्पात संयंत्र कहलाते हैं। इन संयंत्रों में इस्पात बनाने के लिए स्क्रेप तथा स्पंज लोहे का प्रयोग होता है। लोहा इस्पात से संबंधित ये इकाइयाँ हल्के किस्म का इस्पात तैयार करते हैं। इस समय भारत में लगभग 200 से अधिक छोटे इस्पात संयंत्र काम कर रहे हैं।

लोहा- इस्पात उद्योग की समस्याएं –

(i) कोकिंग कोयला की सीमित उपलब्धता :- हमारे देश में लोहा तो प्रचुर मात्रा में है लेकिन इस उद्योग में प्रयोग होने वाला कोकिंग कोयला की कमी है।

(ii) स्वदेशी तकनीक की कमी :- भारत में लोहा- इस्पात के क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक की कमी इसके विकास में प्रमुख समस्या है।

(iii) ऊर्जा की अनियमित पूर्ति :- हमारे देश में ऊर्जा की काफी विकास किया गया है फिर भी ऊर्जा की आपूर्ति नियमित नहीं है।

(iv) पूंजी की कमी :- इस उद्योग को स्थापित करने के लिए पर्याप्त पूंजी की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि अधिकांश लोह- इस्पात संयंत्र सार्वजनिक क्षेत्र में है।

(v) परिवहन की कमी :– इस उद्योग में प्रयुक्त कच्चे माल के लिए सस्ते परिवहन की आवश्यकता होती है। भारतः में यह मुख्यतः रेलवे द्वारा ही ढ़ोया जाता है जो महंगा पड़ता है।

(vi) कम श्रमिक उत्पादकता :- इस उद्योग के लिए देश में कुशल श्रमिकों की कमी है।

उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए किए गए सुधार-

(i) निजी क्षेत्र में लगातार उद्यमियों की संख्या बढ़ रही है उनके निजी प्रयत्न से देश के लोहा इस्पात उत्पादन में पिछले कुछ वर्षों से बढ़ोतरी हुई है।
(ii) उदारीकरण की नीति से भी सार्थक परिणाम मिले हैं।
(iii) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी इस उद्योग में लगातार बढ़ रहा है जिसके परिणाम स्वरूप लोहा- इस्पात उद्योग को प्रोत्साहन मिला है तथा उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है।
(iv) इस उद्योग में नई-नई तकनीक को लागू किया गया है। लेकिन, इस्पात उद्योग को अधिक स्पर्धावान बनाने के लिए अनुसंधान और विकास के साधनों को नियत करने की आवश्यकता है।

(II) उद्योग पर्यावरण को कैसे प्रदूषित करते हैं?
(Jac board 2014, 2016, 2019)

उत्तर :- निर्माण उद्योगों का देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। लेकिन उद्योगों ने प्रदूषण को बढ़ाया है जिससे पर्यावरण का ह्रास हुआ है। ये उद्योग चार प्रकार के प्रदूषण के लिए उत्तरदायी हैं-

(i) वायु प्रदूषण
(ii) जल प्रदूषण
(iii) भूमि प्रदूषण
(iv) ध्वनि प्रदूषण
(v) तापीय प्रदूषण

(i) वायु प्रदूषण-

• उद्योगों से निकलने वाला गैस सल्फर डाइऑक्साइड तथा कार्बन मोनोऑक्साइड वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है।
• रसायन व कागज उद्योग स्टोर के भट्टे, तेल शोधनशालाएँ, प्रगलन उद्योग, जीवाश्म ईंधन दहन तथा छोटे-बड़े कारखाने प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन करते हुए धूआँ निष्कासित करते हैं।
• वायु प्रदूषण मानव स्वास्थ्य, पशुओं, पौधों, इमारतों, तथा पूरे पर्यावरण पर दुष्प्रभाव डालते हैं।

(ii) जल प्रदूषण-

• उद्योगों द्वारा कार्बनिक तथा अकार्बनिक अपशिष्ट पदार्थों के नदी में छोड़ने से जल प्रदूषण फैलता है।
• जल प्रदूषण के प्रमुख कारक कागज, लुगदी, रसायन वस्त्र तथा रंगाई उद्योग, तेल शोधनशालाएँ, चमड़ा उद्योग तथा इलेक्ट्रोप्लेटिंग उद्योग हैं जो रंग, अपमार्जक, अम्ल, लवण तथा भारी धातुएं जैसे सीसा, पारा, कीटनाशक, उर्वरक, कार्बन प्लास्टिक और रबर सहित कृत्रिम रसायन आदि जल में वाहित करते हैं।

(iii) भूमि प्रदूषण-

उद्योगों से निकलने वाले कचरे विशेषकर काँच, हानिकारक रसायन, औद्योगिक बहाव, पैकिंग लवण तथा कूड़ा कर्कट मिट्टी को अनुपजाऊ बनाता है। वर्षा जल के साथ यह प्रदूषक भूमि से रिस्ते हुए भूमिगत जल तक पहुंच कर उससे भी प्रदूषित कर देते हैं।

(iv) ध्वनि प्रदूषण-

• ध्वनि प्रदूषण से चिंता तथा उत्तेजना ही नहीं वरन् श्रवण, असक्षमता, ह्रदय गति, रक्तचाप, ह्रदय रोग जैसे शारिरीक रोग बढ़ते हैं।
• औद्योगिक तथा निर्माण कार्य कारखानों के उपकरण जनरेटर, लकड़ी चीरने के कारखाने, गैस यांत्रिकी तथा विद्युत ड्रिल भी अधिक ध्वनि उत्पन्न करते हैं।

(v) तापीय प्रदूषण-

• जब कारखानों तथा तापघरों से गर्म जल को बिना ठंडा किए ही नदियों तथा तालाबों में छोड़ दिया जाता है, तो जल में तापीय प्रदूषण होता है।
• परमाणु ऊर्जा संयंत्र के अपशिष्ट व परमाणु शस्त्र उत्पादक कारखानों से कैंसर, जन्मजात विकार तथा आकाल प्रसव जैसी बीमारियां होती हैं।

(III) उद्योगों द्वारा पर्यावरण निम्नीकरण कम करने के लिए उठाए गए विभिन्न उपायों की चर्चा करें?
(Jac board 2010, 2012, 2014, 2017)

उत्तर :- मानव विकास के लिए उद्योग आवश्यक हैं। मनुष्य अपनी बुद्धिमता तथा वैज्ञानिक तरीकें अपनाकर उद्योगों द्वारा होने वाले प्रदूषण को कम कर सकता है। इसके लिए एक योजना बनाने की आवश्यकता है। जो निम्न उपाय हो सकते हैं-

(i) उद्योगों को निर्धारित क्षेत्र में स्थापित करना चाहिए।
(ii) उपकरणों की गुणवत्ता को बनाए रखकर तथा उनके सही परिसंचालक द्वारा प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
(iii) जहाँ भूमिगत जल स्तर कम है, वहाँ उद्योगों द्वारा इसके अधिक निष्कासन पर कानूनी प्रतिबंध होना चाहिए।
(iv) वायु से निलंबित प्रदूषण को कम करने के लिए कारखानों में ऊँची चिमनियाँ, चिमनियों में एलेक्ट्रोस्टैटिक अवक्षेपण स्क्रबर उपकरण तथा गैसीय प्रदूषक पदार्थों को जड़त्वीय रूप से पृथक करने के लिए उपकरण होना अवश्य चाहिए।
(v) कारखानों में कोयले की अपेक्षा तेल व गैस के प्रयोग से धुएँ के निष्कासन में कमी लाया जा सकता है।
(vi) मशीनों तथा जनरेटरों में साइलेंसर लगाकर कम ध्वनि प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
(vii) ध्वनि अवशोषित करने वाले उपकरणों के इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
(viii) उद्योगों से निकलने वाले गिले कचरे को साफ करके ही नदी नालों में छोड़ने चाहिए।

सतत् विकास के लिए उपरोक्त उपाय आवश्यक है। क्योंकि मानव विकास के लिए उद्योग भी आवश्यक है और पर्यावरण संरक्षण भी।

•• क्रियाकलाप

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उत्तर :-

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उत्तर :- (i) कृषि आधारित (AGROBASED)
(ii) गन्ना (SUGARCANE)
(iii) जूट (JUTE)
(iv) लोहा इस्पात (IRON-STEEL)
(v) भिलाई (BHILAI)
(vi) वाराणसी (VARANASI)

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कुछ अतिरिक्त प्रश्न

1. लोहा तथा इस्पात उद्योग के लिए आवश्यक आधारभूत वस्तुओं का वर्णन करें?
(Jac board 2009)

उत्तर:- लोहा इस्पात के लिए आवश्यक आधारभूत वस्तु अर्थात कच्चा माल लौह अयस्क, कोकिंग कोयला, चूना पत्थर है। ये क्रमशः 4:2:1 के अनुपात में उपयोग में लाए जाते हैं। इस को कठोर बनाने के लिए इसमें कुछ मात्रा में मैग्नीज की आवश्यकता पड़ती है।

2. भारत में प्रति व्यक्ति इस्पात की खपत इतनी कम क्यों है?

उत्तर:- विकसित देशों की अपेक्षा भारत में इस्पात की खपत कम है इसके कुछ निम्न कारण है-
(i) भारत में लोगों का आय का निम्न स्तर है।
(ii) भारत में इस्पात के विकल्प कम मूल्य में मिल जाते हैं तथा वे टिकाऊ भी होते हैं।
(iii) इस्पात के ये विकल्प वजन में हल्के होते हैं तथा आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने में भी सुविधाजनक होते हैं।
(iv) इस्पात अधिक महंगा होने के कारण आम लोगों की पहुंच से दूर है।

3. क्या घरेलू उद्योगों के विषय में जानते हैं?

उत्तर:- इस प्रकार के उद्योगों में अधिकतर दो या दो से अधिक परिवार के सदस्य मिलकर कार्य करते हैं। वे ऐसी वस्तुओं का निर्माण करते हैं जिनके लिए कच्चा माल स्थानीय तौर पर उपलब्ध होता है। इस प्रकार की अधिकतर वस्तुएं हाथ से बनाई जाती हैं। जैसे:- टोकरी, चटाई, फूलदान बनाना, घड़ा सुराही, पापड़, पतल बनाना इत्यादि।

4. महात्मा गांधी ने सूत काटने तथा खादी बुनने पर क्यों बल दिया?

उत्तर:- स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए महात्मा गांधी ने सूत काटने तथा खादी बुनने पर बल दिया था। इसके कुछ निम्नलिखित कारण थे-
(i) राष्ट्रीयता की भावना को जागृत करने हेतु
(ii) अधिक से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से
(iii) ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए
(iv) विदेशी कपड़ों पर निर्भरता कम करने तथा विदेशी कपड़े का बहिष्कार करने के उद्देश्य से

5. छोटानागपुर पठार के आसपास लोहा इस्पात उद्योग के अधिक केंद्रित होने के क्या कारण है?

उत्तर:- छोटानागपुर के पठारी क्षेत्र में अधिकांश लोहा तथा इस्पात उद्योग केंद्रित है। जमशेदपुर, बोकारो, दुर्गापुर, राउरकेला और भिलाई में लोह इस्पात के कारखाने लगे हुए हैं। इस क्षेत्र में इस उद्योग के विकास के लिए अधिक अनुकूल दशाएं मौजूद है। जो निम्न है-

(i) छोटानागपुर के पठार में प्रचुर मात्रा में लौह अयस्क  उपलब्ध है। झारखंड और उड़ीसा के सीमावर्ती क्षेत्रों में लौह अयस्क के कई खाने हैं। जिस कारण यहां लोह अयस्क की ढुलाई पर कम खर्च आता है।

(ii) लोह इस्पात  बनाने के लिए ऊर्जा के रूप में कोयले की बड़ी मात्रा में आवश्यकता पड़ती है। छोटानागपुर का पठार गोंडवाना क्रम के कोयला के क्षेत्र में है। जिस कारण यहां कोयले की सस्ते दर पर आपूर्ति हो जाती है।

(iii) लोह इस्पात में प्रयुक्त होने वाले अन्य कच्चा माल जैसे चुना पत्थर और मैग्नीज भी यहां प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है।

(iv) छोटानागपुर पठार का उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे सघन जनसंख्या वाले क्षेत्र से सटे होने के कारण यहां सस्ते श्रमिक उपलब्ध हो जाते हैं।

(v) आसपास के क्षेत्रों में सघन जनसंख्या के कारण लौह इस्पात की बड़ी मांग है।

(vi) छोटानागपुर पठार में परिवहन के साधन के रूप में रेल और सड़क परिवहन का विकास समुचित रूप से हुआ है।

उपरोक्त कारणों के कारण ही छोटानागपुर पठार के आसपास लोह इस्पात उद्योग अधिक लगे हुए हैं।
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