अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस का इतिहास और वर्तमान तथा महत्व

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस का इतिहास और वर्तमान तथा महत्व

आज दुनिया भर में 54वाँ साक्षरता दिवस मनाया जा रहा है। शिक्षा मानव को विकास के पथ पर ले जाता है। आज वही देश अधिक विकसित है जो अधिक शिक्षित है। इसलिए शिक्षा को विकास का आधार माना गया है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इसी को देखते हुए विश्व भर में साक्षरता दिवस मनाने का निश्चय किया। इस पोस्ट में जानेंगे अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस का इतिहास और वर्तमान और भारतीय संदर्भ में महत्व

उद्देश्य :- 

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना है। उन्हें मानव विकास और समाज के लिए अधिकारों को जानने और स्वच्छता की ओर मानवीय चेतना को बढ़ावा देना है। भारत सहित दुनिया भर में शिक्षा के जरिए ही गरीबी मिटाई जा सकती है। बाल मृत्यु दर कम की जा सकती है। जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रण किया जा सकता है। लैंगिग विषमता को दूर किया जा सकता है। और ये सभी मानव विकास के बाधक है। शिक्षा के माध्यम से ही उन्हें दूर किया जा सकता है।

साक्षरता का अर्थ :- 

अलग-अलग देशों में साक्षरता की अलग-अलग परिभाषा दी गई है। भारत के जनगणना के अनुसार एक व्यक्ति जिसकी आयु 7 वर्ष या उससे अधिक है। जो किसी भी भाषा को समझकर लिख या पढ़ सकता है, उसे साक्षर कहा गया है।
              हालांकि साक्षरता अर्थ केवल पढ़ना लिखना या शिक्षित होना ही नहीं है, बल्कि यह लोगों के अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता लाकर सामाजिक विकास का आधार बन सकती है।

साक्षरता दिवस की शुरुआत :- 

1965 में  8 से 19 सितंबर के बीच ईरान की राजधानी तेहरान में दुनिया भर के शिक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने को लेकर पहली बार चर्चा किया गया। यूनेस्को (UNESCO) ने घोषणा की कि हर साल  8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाएगा। इसके बाद 1966 से प्रतिवर्ष 8 सितम्बर से यह दिवस मनाया जाता है।
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विश्व साक्षरता दिवस 2020 का थीम :-

2020 का थीम है विशेष रूप से शिक्षकों की भूमिका और शिक्षण शिक्षा की भूमिका पर “साक्षरता शिक्षण और कोविड-19 संकट से परे और उससे परे के संकट” से संबंधित है। इसमें मुख्यतः युवाओं और वयस्कों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का थीम अलग होता है – 

2015 – “साक्षरता एवं सतत् समाज”
2016 – ” इतिहास पढ़े और भविष्य लिखें”
2017 – ” डिजिटल दुनिया में शिक्षा”
2018 –  “साक्षरता और कौशल विकास”
2019 – ” साक्षरता और बहु भाषावाद”
2020 – “साक्षरता शिक्षण और कोविड-19 संकट से परे और उससे परे के संकट”

विश्व में साक्षरता :-

• विश्व की साक्षरता लगभग 85% है।
• भारत विश्व का सबसे बड़ा निरक्षरता वाला देश है। उसके अलावा अफ्रीकी देशों में नाइजर में साक्षरता बहुत कम है।

विश्व के कुछ बेहतरीन शिक्षा पद्धति वाले देश

1. सिंगापुर –
2. फिनलैंड –
3. नीदरलैंड –
4. स्विजरलैंड –
5. बेल्जियम –
6. डेनमार्क –
7. नॉर्वे –
8. अमेरिका –
9. ऑस्ट्रेलिया –
10. न्यूजीलैंड –
इसके अतिरिक्त कनाडा, जापान, इजराइल, इंग्लैंड, दक्षिण कोरिया इत्यादि देशों में भी शिक्षा के बेहतरीन पद्धतियां मौजूद है।

भारत में साक्षरता की स्थिति :-

यूनेस्को के ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2050 तक प्राथमिक शिक्षा, 2060 तक माध्यमिक शिक्षा और 2085 तक उच्च माध्यमिक शिक्षक का वैश्विक लक्ष्य हासिल करने में कामयाब होगा।
•भारत में तकरीबन 28 करोड़ जनसंख्या शिक्षा है।
• यूनेस्को के अनुसार भारत विश्व का सबसे बड़ा निरक्षर देश है।
• आजादी के समय भारत में लगभग 18% साक्षरता दर थी।
• 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार देश में 74% साक्षरता दर है। जिसमें 82% पुरुषों में तथा 65% महिलाओं में साक्षरता दर है।
• इस प्रकार आजादी के बाद से भारत में लगभग 57% साक्षरता बढ़ी है।
• भारत के सबसे अधिक साक्षर राज्य केरल है। जिसकी साक्षरता दर 94% है। वहीं मिजोरम में 91% गोवा में 89% साक्षरता दर है।
• जबकि सबसे कम साक्षरता वाला राज्य बिहार है। जिसकी साक्षरता दर 63% है।
• वहीं अरुणाचल 63% तेलंगाना 66% राजस्थान 67% झारखंड में 68% साक्षरता के साथ सबसे कम साक्षर वाले राज्यों में से एक है।

साक्षरता को प्रभावित करने वाले कारक –

1. गरीबी
2. विद्यालयों की कमी
3. विद्यार्थी शिक्षक अनुपात सही
4. जातिवाद
5. भ्रष्टाचार
6. लड़कियों के साथ छेड़छाड़

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Last Update
08/09/2020

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